Sunday, April 27, 2008

कलपना चावला

कलपना चावला
हिंद की शान थी कलपना चावला
क़ाबिले क़द् जिसका रहा हौसला
जब ख़लाई मिशन पर रवाना हुई
तै किय़ा कामय़ाबी से हर मरहला
कर के अससी से ज़यादह अहम तजरबे
सात साइ़ंसदानो़ का यह क़ाफिला
जब ख़लासे ज़मीं पर रवाना हुआ
लौटते वक़त पेश आगया हादसा
जान दे करख़ला मे़ अमर हौ गई
है यह तारीख़ का एक अहम वाके़या
थी यकुम फिरवरी जब वह रुख़सत हुई
था क़ज़ा वो क़दर कायही फैसला
जब मनाते है़ सब लोग साइंस डे
पेश आया उसी माह यह हादसा
अहले करनाल तनहा न थे दमबखुद
जिस किसी ने सुना था वही ग़मज़दह
इस से मिलती है तहरीके म़ंज़िल रसी
है नहीं रायगां कोई भी सानेहा
कामयाबी की है शरते अववल यही
हो कभी कम न इ़ंसान का वलवलह
जाऐ पैदाइश उसकी थी जिस गांव में
पूछते हैं सभी लोग उसका पताता
तुम भी पड लिख के अब नाम रौशन करो
तै करो कामयाबी से हर मरहलह
सारी दुनिंयां में रहते हैं वह सुरखु़रू
आगे बङने का रखते हैं जो हौसला
कयंु नहीं हम को रग़बत है साइंस से
है हमारे लिए लमहए फिकरियह
ग़ौर और फिकर फितरत के असरार पर
है यही अहले साइंस का मशग़लह
माहो मिररीख़ जब तक है़ जलवा फेगन
ख़तम होगा न तहकीक़ का सिलसिला
आइए हम भी अपनांएं साइंस को
आज जो कुछ है सब है इसी का सिला
वक़त की यह ज़रूरत है अहमद अली
कर दिया ख़तम जिसने हर एक फासलह

ایڈز کا کس طرح ھوگا سد باب

ایڈز کا کس طرح ھوگا سد باب
از
ڈاکٹر احمد علی برقی اعظمی
ذاکر نگر، نئی دھلی

ھے جھاں میں اک مسلسل اضطراب
ایڈز کا کس طرح ھوگا سد باب
ھے یہ بیماری ابھی تک لا علاج
کھا رھے لوگ جس سے پیچ و تاب
آج کل جو لوگ ھیں اس کے شکار
زند گی ھے انکی گو یا اک عذ اب
اپنی لا علمی سے ابنائے وطن
کر رھے ھیں ان سے پیھم اجتناب
در حقیقت ھے یہ اک مھلک مرض
جس سے ھیں خطرات لاحق بے حساب
جسم و جاں میں ھے توازن لازمی
کیجئے ایسا طریقہ انتخاب
ھو نہ پیدا ان میں کوئی اختلال
جو بھی کرنا ھے اسے کر لیں شتاب
ھوتے ھی کمزور جسمانی نظام
روح میں ھوتا ھے پیدا اضطراب
سلب ھو جاتی ھے طاقت جسم کی
دینے لگتے ھیں سبھی اعضاء جواب
رفتہ رفتہ آتا ھے ایسا زوال
جسم کھو دیتا ھے اپنی آب و تاب
ماھرین طب ھیں سرگرم عمل
تا کہ اس کا کر سکیں وہ سد باب
جس طرح "ٹی بی" تھی پھلے لا علاج
آج ھے اس کا تدارک دستیاب
اس کا بھی مٹ جائے گا نام و نشآں
ھو گئی کوشش جو ان کی کامیاب
اک نہ اک دن تیرگی چھٹ جائے گی
دور ھو جا ئے گا ظلمت کا سحاب
کیجئے احمد علی حسن عمل
ھے ضروری ایک ذھنی انقلاب

آج ھے انفارمیشن ٹکنالوجی کی بھار

آج ھے انفارمیشن ٹکنالوجی کی بھار
ڈاکٹر احمد علی برقی اعظمی
ذاکر نگر، نئی دھلی

آج ھے انفارمیشن ٹکنولوجی کی بھار
کوئی "گوگل" پر فدا ھے کوئی " یاھو پر نثار
کوئی " اردوستان" و "وکیپیڈ یا" کا ھے اسیر
ھے کسی کو صرف "ٹو سرکلس نیٹ" کا انتظار
ھے " بلاگ اسپاٹ" کا گرویدہ کوئی اور کوئی
کر رھا ھے دوسری ویب سائٹوں پر انحصار
"انڈیاٹائمز"ھو، "جی میل" ھو یا " ھاٹ میل"
چل رھا ھے "آئی ٹی" سسے آج سب کا کاروبار
آج ھے سسائنس پر ھر چیز کا دار و مدار
اب نئی قدروں پہ ھے اھل جھاں کا اعتبار
اب نھیں کچہ فرق قرب و بعد میں "ای میل" سے
لوگ آخر کیوں کریں اب نامہ بر کا انتظار
زندگی کا کوئی بھی شعبہ نھیں اس سے الگ
آج کمپیوٹر پہ ھے سارے جھاں کا انحصار
ھو فضائی ٹکنولوجی یا نظام کائنات
کرتے ھیں معلوم اس سے گردش لیل و نھار
جانتے ھیں لوگ اس سے کیا ھے موسم کا مزاج
کیوں فضا میں اڑ رھے ھیں ھر طرف گرد و غبار
اس کا ھے مرھون منت آج سارا میڈ یا
جتنے سیٹ لائٹ ھیں سب کا ھے اسی پر انحصار
ھے سبھی سیٹ لائٹوں کا اس سے پیھم رابطہ
ورلڈ وائب ویب سے ھے یہ ھر کسی پر آشکار
عصر حاضر میں نھیں اس سے کسی کو ھے مفر
پڑتی ھے اس کی ضرورت ھر کسی کو بار بار
"آئی ٹی" کو آپ بھی اپنائۓ احمد علی
آج ھے اس کے لئے ماحول بیحد سازگار

بیاد گار کلپنا چاولھ- بمناسبت سائنس ڈے

بیاد گار کلپنا چاولھ- بمناسبت سائنس ڈے
از
ڈاکٹر احمد علی برقی اعظمی
ذاکر نگر، نئی دھلی

ھند کی شان تھی کلپنا چاولھ
قابل رشک جسکا رھا حوصلھ
جب خلا ئی مشن پرروانھ ھووئی
طے کیا کامیابی سے ھر مر حلھ
کر کے اسسی سے زیادہ اھم تجر بے
سات سائنسدانوں کا یھ قافلھ
جب خلا ء سے زمیں پر روانھ ھوئی
لوٹتے وقت پیش آ گیا حادثھ
جان دے کر خلاءمیں امر ھو گئی
ھے یہھ تاریخ کا اک اھم واقعہ
تھی یکم فروری جب وہ رخصت ھوئی
تھا قضا ء و قدر کا یھی فیصلھ
جب مناتے ھیں سب لوگ سائنس ذے
پیش آیا اسی ماہ یہ سانحھ
اھل کر نال تنھا نہ تھےدم بخود
جس کسی نے سنا، تھا وھی غمزدہ
اس سے ملتی ھے تحریک منزل رسی
ھے نھیں رائیگاں کوئی بھی سانحھ
کامیابی کی ھے شرط اول یھی
ھو کبھی کم نہ انسان کا ولولھ
جائے پیدائش اسکی تھی جس کاؤں میں
پو چھتے ھیں سبھی لوگ اس کا پتھ
تم بھی پڑہ لکھ کے اب نام روشن کرو
طے کرو کامیابی سے ھر مرحلہ
ساری دنیا میں رھتے ھیں وہ سرخر
آگے بڑھنے کا رکھتے ھیں جو حوصلھ
کیوں نھیں ھم کو رغبت ھے سائنس سے
ھےھمارے لئے لمحھ فکر یھ
غور اور فکر فطرت کے اسرارپر
ھے یھی اھل سائنس کا مشغلھ
ماہ و مریخ جب تک ھیں جلوہ فگن
ختم ھو گا نہ تحقیق کا سلسلھ
آئۓ ھم بھی اپنا ئیں سائنس کو
آج جو کچھ ھے سب ھے اسی کا صلھ
وقت کی یہ ضرورت ھے احمد علی
کر دیاختم جس نے ھر اک فاصلھ



Information Technology

इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी
हिंद था हर दौर में गह्वारह ऐ इल्म ओ हुनारिस लिए यह सरज़मीं थी मर्जः ऐ अहल ऐ नज़र्था दराख्शन इस का माजी हाल भी है तब्नाखोगा मुस्ताक्बिल भी राशन कह रहे हैं दिदः वार्क़फिला तहकीक का है सु ऐ मंजिल गम्ज़न्कुछ भी नामुमकिन नहीं है हो अगर अजम ऐ सफराज कंप्यूटर को हासिल है कलिदी हैसियाथई यह असरी आगाही का एक वासिलाह कर्गढ़ईं सर ऐ फिह्रिस्ट विप्रो और सत्यम आज्कल्नाम है उनका जहाँ ऐ इल्म ओ फेन में मोताबर्प्रेमजी ने आईटी में कर के बरपा इन्किलाभिंद को सरे जहाँ में कर दिया है नाम्वार्हाई यह सब इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी का कमाल्लोग गिर्द ओ पेश के हालत से हैं बखाबर्मुल्क की तामीर ऐ नौ में हैं जो सरगर्म ऐ अमल्राह्नुमै कर रही है उनकी यह शाम ओ सहर्हाई मुहीत आधी सदी पर इस की इल्मी पेश्रफ्त्हाई सबक आमुज़ इस की कामयाबी का सफरिस्तेफदः कर रहे हैं आज इस से खास ओ आमाज यह राह ऐ तरक्की में है सब का हम्सफर्लोग हर शोबे में इस से हो रहे हैं फैज्याबस्र ऐ हाजिर मैं है यह नाख्ल ऐ सआदत का समर्वोर्ल्ड वाइड वेब का फैला हर तरफ़ है एक जाल्तेज्तर ऐ मेल से कोई नहीं है नमः बरहम फजई टेक्नोलॉजी में किसी से कम नहिंदेता है "इन्सत" हम को सारे आलम की खबराज्कल है कॉल सेंटर से सभी का राब्ताहिस से पैहम मुत्तासिल हैं कर्गाह ऐ बहर ओ बरल्घराज़ हर चीज़ है अब "आईटी" से मुन्सलिक्कोई शै ऐसी नहीं है जिस को हो इस से मफर्मुन्हासिर है आईटी पर आज सारा मेदिईस की तद्रीजे तरक्की का न होगा बंद दराइये अहमद अली बरकी करें ताज्दिद ऐ अह्द्तई करेंगे हम मुसलसल कामयाबी का सफर

Aaj Hai Information Technology Ki Bahar

आज है इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी की बाहर
आज है "इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी " की बहार्कोई " गूगल" पर फ़िदा है कोई "याहू" पर निसराज है स्सिएंस पर हर चीज़ का डर ओ मदराब ने क़द्रों पे है अहल ऐ जहाँ का एतेबराब नहीं कुछ फर्क कुर्ब ओ बोड में ऐ मेल सेलोग आख़िर क्यों करें अब नमः बार का इन्तेज़र्जिंदगी का कोई भी शोबा नहीं इस से अलागाज कंप्यूटर पे है सरे जहाँ का इन्हेसर्हो फजई टेक्नोलॉजी या निजाम ऐ कैनात्कारते हैं मालूम इस से गर्दिशे लील ओ नहार्जनते हैं लोग इस से क्या है मौसम का मिज़ज्क्यों फिजा में उड़ रहे हैं हर तरफ़ गर्द ओ घुबरिस का है मरहूँ ऐ मिन्नत आज सारा मेदिअजित्ने सेत्ल्लिते हैं सब का है इसी पर इन्हिसार्हाई सभी सेत्त्लितों का इस से पैहम रब्तःवोर्ल्ड वाइड वेब से है यह हर किसी पर आश्कारास्र ऐ हाजिर में नहीं इस से किसी को है मफर्पद्ती है इस की ज़रूरत हर किसी को बार बार"आईटी" को आप भी अपनाइए अहमद अलिआज है इस के लिए माहौल बेहद साज्गर

Hai Aaloodgi baaise haadsaat

है आलूदगी बैसे हाद्सात
मनाते हैं हम यम ऐ महौलियात्मिले तकेह आलूदगी से नाजात्नाहीं है कोई चीज़ इस से मुजिर्ख्तर में हीस से निजाम ऐ हयात्कोई शहर में हो कह देहात मेंहैन दरपेश हर शख्स को मुश्किलाथुई यूनियन कार्बिदे से जोनाहीं लोग भूलेंगे वह व्र्दाथावादिस का जरी है एक सिल्सिलाह्हैन तारीख में साबत यह सनेत्बहुत खूब है सन्ति पेश्रफ्त्हाई आलूदः इस से मगर शश जेहात्सेहत्मंद माहौल होगा जभिहो आलूदः शहरों की जल्दी शेनाख्तिसी में है हर शख्स की बेह्तारिक्सफत से महफूज़ हो काय्नात्फेज़ा दिन बदं हो रही है क्सीफ्परीशान है हर शख्स दिन हो कह रात्कयोतो पह जब तक न होगा अमल्जहाँ से नहीं होंगे कम सनेहाथैन हालत हद दर्जः तश्वीश्नाक्ताबाही की ज़द में हैं अब जन्गालाथई मौसम पे जिस का नुमायां असर्नाहीं है किसी चीज़ को भी सबात्सभी चाहते हैं यह अहमद अलिमिले उनको आलूदगी से नजात

Sunita William Ka Safar Science ka Hai Mojzah

सुनीता विलियम का सफर स्सिएंस का है मोज्जः
सुनीता विलियम के खलाई तजरबे का मर्हलाहौर फिर "नासा" से उसका एक मुसलसल रब्ताहस्र ऐ हाजिर में है यह स्सिएंस का ओज ऐ कमाल्मुद्दतों करते रहेंगे लोग जिसका ताज्केराह्कुछ भी नामुमकिन नहीं है अजम ऐ रसिख हो अगर्दार्स ऐ इबरत है हमारे वास्ते यह वाकेअह्जिन में है जौक ऐ ताजस्सुस और असरी आगहेयूनका है शाम ओ सहर तहकीक फित्री मश्घलाह्नाऊ दिसम्बर को रावनाह वह हुई सु ऐ फलाक्लायाक ऐ तहसीन है यह अजम ऐ सफर यह हौसलाह्थी फेज़ा में नौ महीने तक वह सरगर्म ऐ अमल्कर्नामः उस का यह है आज तक बेसब्क़हेक ज़र्रिन बाब है तारिख का टीस(२३) जुनेकम्याबी से हुआ तक्मील जब यह मर्हलाह्होंगे फितरत के बहुत से राज़ हमपर मुन्कशिफह्ल ऐ डेनिश जब करेंगे इसका इल्मी ताज्जियाहागाया अत्लान्तिस लेकर खालाबजों को सात्हब मिलेगा उन को उनकी कामयाबी का सिलाहह्द ऐ हाजिर में है अब स्सिएंस बेहद सूद्मंदाइये मिल जुल के हम भी यह करें अब फैसलाह्हम भी अपनायेंगे इसको अहल ऐ मघ्रिब की तरह्रुक नहीं सकता कभी तहकीक का यह सिल्सिलाहह्ल ऐ मशरिक इल्मो दानिश में किसी से कम नहिंकम्याबी से किया "सुनीता" ने तै हर मर्हलाह्दर हकीकत है यह बरकी एक मिशन तरीख्सज़"सुनीता विलियम"का सफर स्सिएंस का है मोज्जः

Thee Maheenon Tak Feza Mein Suunita William Makeen

थी महीनों तक फेज़ा में सूनिता विलियम मकीं
मुन्फरिड है सब रिसलों से यह उर्दू मगजिनेकर्ती है हमवार जो इल्मी तानाजुर की ज़मीन्जिन में है जौक ऐ ताजस्सुस और असरी आगहीकारते हैं स्सिएंस से वह इस्तेफदः बेह्तारीन्जिदगी का कोई भी शोबह नहीं इस से अलाघई यही हर कारगाह ऐ टेक्नोलॉजी की मशीन्सरी दुनिया में है इसका आजकल बाज़ार गर्म्जिसकी ईजदत से है यह जहाँ बेहद हसीन्कार्वान तहकीक का है इस से सरगर्म ऐ अमल्हर तरफ़ जिस का अयन है एक नक्श ऐ दिल्नाशीन्राडियो और तेलेविसिओं हैं इसी का शःकार्होते हिएँ मह्जूज़ जिस से समीन ओ नाज्रीन्हार तरफ़ है जिस से बरपा एक जेहनी इन्केलाबाज कंप्यूटर है इसका एक नमूनाह बेह्तारीन्फस्लाह कोई नहीं है आज कुर्ब ओ बोड मेंदास्तारस में अब है मिर्रिख ओ कमर की सर्ज़मीन्कतरे हैं अहल ऐ ज़मीं शाम ओ सहर स्पस वाल्क्थी महीनों तक खला में "सूनिता विलियम "मकीनाज्म ऐ रासिख हो अगर टू हम किसी से कम नहिंकोई माने या न माने है मुझे इसका याकींहम भी हो सकते हैं मैदान ऐ अमल में सुर्ख्रूहैन हमारे नौजवान अहमद अली बेहद जेहीं

Hai "Science " Qudrat ki Anmol Neamat

है "स्सिएंस " कुदरत की अनमोल नामत
है "स्सिएंस " कुदरत की अनमोल नेअमत्बदल दी है जिस ने ज़माने की सूरात्जहाँ में हर ईजाद की माँ यही हैहाई सब से बड़ी वक्त की यह ज़रूरातिसी की हर एक शै है मरहूँ ऐ मिन्नात्मुयास्सर है सब कुछ इसी की बदौलात्येह बिजली भी स्सिएंस का है क्रिश्म्ह्ताराक्की की जो आजकल है ज़मानात्किया बल्ब ईजाद "एडिसन" ने जब सेजहाँ हो गया है बहुत खूब्सूराथर एक गाओं और शहर है इस से रौशंहाई डर असल कुदरत की यह एक नेअमतना हो घर में बिजली टू कुछ भी नहीं हैयेह है ज़िंदगी में खुशी की एलामत्येह पंखे यह कोर यह गेय्सेर यह अच्सभी के लिए आज है इसकी हाजत्येह स्सिएंस ही का है अनमोल तुह्फसभी के लिए है जो वजह ऐ सादथई वाबतः इस से हर एक तेच्नोलोग्य्ताराक्की की डर असल है यह एलामत्येह है खिदमत ऐ खल्क का एक वासिलाह्जिन्हें हक ने बख्शी है फहम ओ फरासत्बनाते हैं स्सिएंस को अपना शेवाह्मिताये जो नाम ओ निशान ऐ जेहालाथई उनके लिए आज यह दरस ऐ इब्रत्बनाते हैं इस से जो समान ऐ घारात्नाहीं जेब देता यह नौ ऐ बशर कोहो अक्वाम ऐ आलम की इस से हेलाकत्याही है हर एक शख्स की अज ख्वाहिश्राहे जज्बह ऐ खैर ख्वाहे सलामात्नाहीं इस में तख्सिस छोटे बड़े किसभी को है अहमद अली इस की चाहत

Zad Mein Aaloodgi ki Hain peer o Jawan

ज़द में आलूदगी की हैं पीर ओ जवान
गर्म से गर्म्तर हो रहा है जहान्भाग कर कोई जाए टू जाए कहान्हर तरफ गाडियाँ हैं रवां और दवान्ज़द में आलूदगी की हैं पीर ओ जवान्शःर में इस कदर है मोकद्दर फिज़हर तरफ़ जैसे छाया हुआ हो धुवान्गओं की ज़िंदगी थी बहुत खुश्नुमाब वहाँ भी हैं आलूदगी के निशानाज्कल साथ ए ओ ज़ोन खतरे में हैहैन यह इंसान की कार फर्मैयांकोई महफूज़ आलूदगी से नहिन्नित ने जिस से लहक हैं बिमारियान्हाई सुनामी कहीं और कहीं ज़लज़ला

Kijiye Aaloodgi ka sadde bab

कीजिये आलूदगी का सद्दे बाब
कीजिये आलूदगी का सद्दे बाब
कीजिये आलूदगी का सद्देबआआसबाब्नाऊ ऐ इन्सान के लिए है यह अज़भई अगर डरकर हिफ्ज़ं ऐ सेहत्किजिये इस से हमेशा इज्तेनाब्जान का जंजाल है आलूद्गिहें मुजिर अस्रत इस के बेहिसब्कर्खानों की मुजिर गैसों से आज्जिसको देखो खा रहा है पेच ओ तभर तरफ़ है कोर्बों ही कोर्बोनोक्सिगें का तावाज़ुं है खराब्घुत रहा है दम मुकद्दर है फिज़जिंदगी में कुछ नहीं है आब ओ तभी फ्लोरिदे का पानी में असर्जिस से है लोगों में बेहद इज्तेराब्झुक गयी फरत ऐ नाकाहत से कमारिस से है डरकर छुटकारा शेताभई परीशंहाल हर छोटा बदाब बड़े शहरों में जीना है अज़ब्नीन्द की गोली भी अब है बे असरुद गया है आजकल आंखों से खावाब्शाक्ल में आलूदगी की आज्कल्हाई मुसल्लत हम पे फितरत का अज़बंगिनित दरपेश हिएँ ऐसे सवाल्जिंका मिलना है अभी बाकी जवाब्मुख्तासर है ज़िंदगी का यह सफर्जो भी करना है हमें कर लें शेताभर किसी के जेहन में है यह सवालाज क्यों माहौल है इतना खराभई ज़रूरत वक्त की अहमद अलीसाब करें मिल जुल के इसका एह्तेसब

Ekkisavin Sadi hai science ka Zamanah

इन्सत-४ब् है "इसरो" का कर्नाम्ह्जो हिंद ने किया है सु ऐ फलक रवनह्स्किएन्केदन् हमारे अब कम नहीं किसी सेसब मुत्ताफिक हैं इस पर है मोतारिफ ज़मानाह्ह्र शख्स की जुबान पर है आज "ग्स्ल्व"है आज एक हकीकत कल तक जो था फसनाह्बेहद मुफीद होगा स्य्स्तेम में "दत" केसब के लिए यह होगा तफरीह का बहनाहब होसके गी इस से तौसीये 'दूरदर्शन'लोगों की अब खुशी का कोई नहीं ठिकानाहायेगा जल्द ही वह दिन भी फजल ऐ रब सेजब 'चंदेर्यान होगा सु ऐ फलक रावनाहब उड़ रहे हैं हर सू सेत्लिते आस्मान परेक्किसविन सदी है 'स्सिएंस' का ज़मानाह्कः दो की जग जाएं घाफ्लत में सोने वालयूनके लिए यह दिन है इबरत का ताजियानाह'तरीख्सज़' दिन है यह बारह मार्च बर्किक्यों हम न अब मनाएं एक जश्न ऐ फतेहनाह

स्लो पोइसों है फिजा में पोल्लुशन्हार एक शख्स पर यह हकीकत है रोशंयुन्ही लोग बे मौत मरते रहेंगेनाह होगा अगर जल्द इसका सोलुतिओन्बदे शर है ज़द मिनालूदगी कीजो हस्सास हैं उनको है इस से उल्झंफिज़ा में हैं तःलील मस्मूम गैसेंहाई महदूद माहौल में ओक्सिगेंजिधर देखिये कार्बन के असर सही मेल बह पज्ह्मुर्दगी सहन ऐ गुल्शंकिसी को दम ही किसी को इल्लेर्ग्य्मोकद्दर हवा से किसी को है तेंसिओंजवानों के आसाब पर है न्क़त्बुज़ुर्गों की अब ज़िंदगी है अजिरंकाहन जाएं हम बच के आलूदगी सेकहीं भी नहीं चैन गुलशन हो या बांकी 'यूनियन कोर्बिदे हैं अब भिजो डर पारदः हैं नौ ऐ इन्सान के दुश्मंस्हब ओ रूज़ आलूदगी बढ़ रही हैहैन नदियाँ सरासर क्सफत का मख्ज़न्जहाँ गर्म से गर्म तर हो रहा हिना हो जाए नौ ऐ बशर इसका एंधान्हाई 'ओ ज़ोन' भी ज़द में आलूदगी कीजो है कुर्रा ऐ अर्ज़ पर सयः अफ्गंजो भरते हैं दम रहबरी का जहाँ किवोह रहबर नहीं डर हकीकत हैं रह्ज़न्कयोतो से करते हैं ख़ुद चश्म पोशिलागाने चले दोस्रों पर हैं क़द्घंबनाते हैं ख़ुद अतोमी असलहे वोह्समझते हैं ख़ुद को मगर पक्दामंत्सुनामी है उनके लिए दरस ऐ इब्रत्दिखाने चले हैं जो फितरत को दर्पंसलामत रवि का ताक़जः यही हैचुदाएं सभी इस मुसीबत से दमन्हाई ' अहमद अली 'वक्त की यह ज़रूरात्बहर्हाल अब सब पे नाफिज़ हो क़द्घन

स्लो पोइसों है फिजा में पोल्लुशन्हार एक शख्स पर यह हकीकत है रोशंयुन्ही लोग बे मौत मरते रहेंगेनाह होगा अगर जल्द इसका सोलुतिओन्बदे शर है ज़द मिनालूदगी कीजो हस्सास हैं उनको है इस से उल्झंफिज़ा में हैं तःलील मस्मूम गैसेंहाई महदूद माहौल में ओक्सिगेंजिधर देखिये कार्बन के असर सही मेल बह पज्ह्मुर्दगी सहन ऐ गुल्शंकिसी को दम ही किसी को इल्लेर्ग्य्मोकद्दर हवा से किसी को है तेंसिओंजवानों के आसाब पर है न्क़त्बुज़ुर्गों की अब ज़िंदगी है अजिरंकाहन जाएं हम बच के आलूदगी सेकहीं भी नहीं चैन गुलशन हो या बांकी 'यूनियन कोर्बिदे हैं अब भिजो डर पारदः हैं नौ ऐ इन्सान के दुश्मंस्हब ओ रूज़ आलूदगी बढ़ रही हैहैन नदियाँ सरासर क्सफत का मख्ज़न्जहाँ गर्म से गर्म तर हो रहा हिना हो जाए नौ ऐ बशर इसका एंधान्हाई 'ओ ज़ोन' भी ज़द में आलूदगी कीजो है कुर्रा ऐ अर्ज़ पर सयः अफ्गंजो भरते हैं दम रहबरी का जहाँ किवोह रहबर नहीं डर हकीकत हैं रह्ज़न्कयोतो से करते हैं ख़ुद चश्म पोशिलागाने चले दोस्रों पर हैं क़द्घंबनाते हैं ख़ुद अतोमी असलहे वोह्समझते हैं ख़ुद को मगर पक्दामंत्सुनामी है उनके लिए दरस ऐ इब्रत्दिखाने चले हैं जो फितरत को दर्पंसलामत रवि का ताक़जः यही हैचुदाएं सभी इस मुसीबत से दमन्हाई ' अहमद अली 'वक्त की यह ज़रूरात्बहर्हाल अब सब पे नाफिज़ हो क़द्घन

Munhasir hai aaj Internet peh duniya ka nizam

मुन्हासिर है आज इंटरनेट पह दुनिया का निजाम अश्हब ऐ दौरान की है अब इसके हाथों में लगाम "वर्ल्ड वाइड वेब" में है मुमताज़ "गूगल.कॉम" इस्तेफदाद कर रहे हैं आज जिस से खास ओ आम सब सवालों का तसल्ली बख्श देती है जवाब इस लिए मशहूर है सरे जहाँ में इसका नाम हैं "रेदिफ्फ्मैल" और "याहू" भी नेहायत कारगर जरी ओ साडी है उनका भी सभी पर फैज़ ऐ आम हैं वासिलाह रब्ते का यह सभी "वेब्सितीं" कर रही हैं खिदमत ऐ खल्क ऐ खुदा जो सुबह ओ शाम फस्लाह कुछ भी नहीं है आज कुर्ब ओ बोड में चाँद लम्हों में कहीं भी भेज सकते हैं पयाम फॉर्म भरना हो कोई या बुक करना हो टिकेट आज "इंटरनेट" से है माकूल इसका इन्तेजाम हर जगह है " ओं लीन" यह सहूलत दस्त्यब "बैंक" हो "स्चूल" हो या "रेलवे" का "प्लात्फोर्म" "रेडियो"," अखबार", "टीवी", "मीडिया"अहले नज़र इस्तेफदः कर रहे हैं आज इस से सब मुदाम है मुआविन आज यह "स्सिएंस" की तहकीक में "टेक्नोलॉजी" मैं भी इस से ले रहे हैं लोग काम क़फेलाह तहकीक का जब तक रहेगा गम्ज़ं काम आएगा मुसलसल इसका हुस्न ऐ इन्तेजाम हैं यह "वेबसाइट"ज़रूरत वक्त की "अहमद अली" इस लिए अहल ऐ नज़र करते हैं इनका एह्तेमम

Jidhar dekho udhar aaloodgi hai

जिधर देखो उधर आलूदगी है
सभी पर आज तारी बेहिसी है
कसफत अब शार ऐ ज़िंदगी है
नुमायां हर तरफ़ पज्ह्मुर्दगी है
फिजा आलूदगी से पाक रखिये
अगर दरकार हुस्न ऐ ज़िंदगी है
न होगा कैंसर लहक किसी को
सभी बीमारियों की म यही है
सभी कुछ मुन्हासिर माहौल पर है
अगर माहौल में पाकीज़गी है
तारो तजः रहेगा जेहन इस से
सुकून ऐ क़ल्ब का ज़मीं यही है
नेशत ओ कैफ से सर्षर होगा
इसी से जेहन में बलिदगी है
गुलों में रंग ओ बू कायम है इस से
शागुफ्तः आज इसी से कर कलि है
नहीं है इस से बेहतर कुछ भी अहमद
यही अपनी माता ऐ ज़िंदगी है