Sunday, April 27, 2008

Munhasir hai aaj Internet peh duniya ka nizam

मुन्हासिर है आज इंटरनेट पह दुनिया का निजाम अश्हब ऐ दौरान की है अब इसके हाथों में लगाम "वर्ल्ड वाइड वेब" में है मुमताज़ "गूगल.कॉम" इस्तेफदाद कर रहे हैं आज जिस से खास ओ आम सब सवालों का तसल्ली बख्श देती है जवाब इस लिए मशहूर है सरे जहाँ में इसका नाम हैं "रेदिफ्फ्मैल" और "याहू" भी नेहायत कारगर जरी ओ साडी है उनका भी सभी पर फैज़ ऐ आम हैं वासिलाह रब्ते का यह सभी "वेब्सितीं" कर रही हैं खिदमत ऐ खल्क ऐ खुदा जो सुबह ओ शाम फस्लाह कुछ भी नहीं है आज कुर्ब ओ बोड में चाँद लम्हों में कहीं भी भेज सकते हैं पयाम फॉर्म भरना हो कोई या बुक करना हो टिकेट आज "इंटरनेट" से है माकूल इसका इन्तेजाम हर जगह है " ओं लीन" यह सहूलत दस्त्यब "बैंक" हो "स्चूल" हो या "रेलवे" का "प्लात्फोर्म" "रेडियो"," अखबार", "टीवी", "मीडिया"अहले नज़र इस्तेफदः कर रहे हैं आज इस से सब मुदाम है मुआविन आज यह "स्सिएंस" की तहकीक में "टेक्नोलॉजी" मैं भी इस से ले रहे हैं लोग काम क़फेलाह तहकीक का जब तक रहेगा गम्ज़ं काम आएगा मुसलसल इसका हुस्न ऐ इन्तेजाम हैं यह "वेबसाइट"ज़रूरत वक्त की "अहमद अली" इस लिए अहल ऐ नज़र करते हैं इनका एह्तेमम

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