Sunday, April 27, 2008

Jidhar dekho udhar aaloodgi hai

जिधर देखो उधर आलूदगी है
सभी पर आज तारी बेहिसी है
कसफत अब शार ऐ ज़िंदगी है
नुमायां हर तरफ़ पज्ह्मुर्दगी है
फिजा आलूदगी से पाक रखिये
अगर दरकार हुस्न ऐ ज़िंदगी है
न होगा कैंसर लहक किसी को
सभी बीमारियों की म यही है
सभी कुछ मुन्हासिर माहौल पर है
अगर माहौल में पाकीज़गी है
तारो तजः रहेगा जेहन इस से
सुकून ऐ क़ल्ब का ज़मीं यही है
नेशत ओ कैफ से सर्षर होगा
इसी से जेहन में बलिदगी है
गुलों में रंग ओ बू कायम है इस से
शागुफ्तः आज इसी से कर कलि है
नहीं है इस से बेहतर कुछ भी अहमद
यही अपनी माता ऐ ज़िंदगी है

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