Hai "Science " Qudrat ki Anmol Neamat
है "स्सिएंस " कुदरत की अनमोल नामत
है "स्सिएंस " कुदरत की अनमोल नेअमत्बदल दी है जिस ने ज़माने की सूरात्जहाँ में हर ईजाद की माँ यही हैहाई सब से बड़ी वक्त की यह ज़रूरातिसी की हर एक शै है मरहूँ ऐ मिन्नात्मुयास्सर है सब कुछ इसी की बदौलात्येह बिजली भी स्सिएंस का है क्रिश्म्ह्ताराक्की की जो आजकल है ज़मानात्किया बल्ब ईजाद "एडिसन" ने जब सेजहाँ हो गया है बहुत खूब्सूराथर एक गाओं और शहर है इस से रौशंहाई डर असल कुदरत की यह एक नेअमतना हो घर में बिजली टू कुछ भी नहीं हैयेह है ज़िंदगी में खुशी की एलामत्येह पंखे यह कोर यह गेय्सेर यह अच्सभी के लिए आज है इसकी हाजत्येह स्सिएंस ही का है अनमोल तुह्फसभी के लिए है जो वजह ऐ सादथई वाबतः इस से हर एक तेच्नोलोग्य्ताराक्की की डर असल है यह एलामत्येह है खिदमत ऐ खल्क का एक वासिलाह्जिन्हें हक ने बख्शी है फहम ओ फरासत्बनाते हैं स्सिएंस को अपना शेवाह्मिताये जो नाम ओ निशान ऐ जेहालाथई उनके लिए आज यह दरस ऐ इब्रत्बनाते हैं इस से जो समान ऐ घारात्नाहीं जेब देता यह नौ ऐ बशर कोहो अक्वाम ऐ आलम की इस से हेलाकत्याही है हर एक शख्स की अज ख्वाहिश्राहे जज्बह ऐ खैर ख्वाहे सलामात्नाहीं इस में तख्सिस छोटे बड़े किसभी को है अहमद अली इस की चाहत

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