Sunday, April 27, 2008

स्लो पोइसों है फिजा में पोल्लुशन्हार एक शख्स पर यह हकीकत है रोशंयुन्ही लोग बे मौत मरते रहेंगेनाह होगा अगर जल्द इसका सोलुतिओन्बदे शर है ज़द मिनालूदगी कीजो हस्सास हैं उनको है इस से उल्झंफिज़ा में हैं तःलील मस्मूम गैसेंहाई महदूद माहौल में ओक्सिगेंजिधर देखिये कार्बन के असर सही मेल बह पज्ह्मुर्दगी सहन ऐ गुल्शंकिसी को दम ही किसी को इल्लेर्ग्य्मोकद्दर हवा से किसी को है तेंसिओंजवानों के आसाब पर है न्क़त्बुज़ुर्गों की अब ज़िंदगी है अजिरंकाहन जाएं हम बच के आलूदगी सेकहीं भी नहीं चैन गुलशन हो या बांकी 'यूनियन कोर्बिदे हैं अब भिजो डर पारदः हैं नौ ऐ इन्सान के दुश्मंस्हब ओ रूज़ आलूदगी बढ़ रही हैहैन नदियाँ सरासर क्सफत का मख्ज़न्जहाँ गर्म से गर्म तर हो रहा हिना हो जाए नौ ऐ बशर इसका एंधान्हाई 'ओ ज़ोन' भी ज़द में आलूदगी कीजो है कुर्रा ऐ अर्ज़ पर सयः अफ्गंजो भरते हैं दम रहबरी का जहाँ किवोह रहबर नहीं डर हकीकत हैं रह्ज़न्कयोतो से करते हैं ख़ुद चश्म पोशिलागाने चले दोस्रों पर हैं क़द्घंबनाते हैं ख़ुद अतोमी असलहे वोह्समझते हैं ख़ुद को मगर पक्दामंत्सुनामी है उनके लिए दरस ऐ इब्रत्दिखाने चले हैं जो फितरत को दर्पंसलामत रवि का ताक़जः यही हैचुदाएं सभी इस मुसीबत से दमन्हाई ' अहमद अली 'वक्त की यह ज़रूरात्बहर्हाल अब सब पे नाफिज़ हो क़द्घन

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