Sunday, April 27, 2008

Zad Mein Aaloodgi ki Hain peer o Jawan

ज़द में आलूदगी की हैं पीर ओ जवान
गर्म से गर्म्तर हो रहा है जहान्भाग कर कोई जाए टू जाए कहान्हर तरफ गाडियाँ हैं रवां और दवान्ज़द में आलूदगी की हैं पीर ओ जवान्शःर में इस कदर है मोकद्दर फिज़हर तरफ़ जैसे छाया हुआ हो धुवान्गओं की ज़िंदगी थी बहुत खुश्नुमाब वहाँ भी हैं आलूदगी के निशानाज्कल साथ ए ओ ज़ोन खतरे में हैहैन यह इंसान की कार फर्मैयांकोई महफूज़ आलूदगी से नहिन्नित ने जिस से लहक हैं बिमारियान्हाई सुनामी कहीं और कहीं ज़लज़ला

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