Sunday, April 27, 2008

Hai Aaloodgi baaise haadsaat

है आलूदगी बैसे हाद्सात
मनाते हैं हम यम ऐ महौलियात्मिले तकेह आलूदगी से नाजात्नाहीं है कोई चीज़ इस से मुजिर्ख्तर में हीस से निजाम ऐ हयात्कोई शहर में हो कह देहात मेंहैन दरपेश हर शख्स को मुश्किलाथुई यूनियन कार्बिदे से जोनाहीं लोग भूलेंगे वह व्र्दाथावादिस का जरी है एक सिल्सिलाह्हैन तारीख में साबत यह सनेत्बहुत खूब है सन्ति पेश्रफ्त्हाई आलूदः इस से मगर शश जेहात्सेहत्मंद माहौल होगा जभिहो आलूदः शहरों की जल्दी शेनाख्तिसी में है हर शख्स की बेह्तारिक्सफत से महफूज़ हो काय्नात्फेज़ा दिन बदं हो रही है क्सीफ्परीशान है हर शख्स दिन हो कह रात्कयोतो पह जब तक न होगा अमल्जहाँ से नहीं होंगे कम सनेहाथैन हालत हद दर्जः तश्वीश्नाक्ताबाही की ज़द में हैं अब जन्गालाथई मौसम पे जिस का नुमायां असर्नाहीं है किसी चीज़ को भी सबात्सभी चाहते हैं यह अहमद अलिमिले उनको आलूदगी से नजात

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